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EVM न हूवा भूत हो गया

आज भी मुझे लगता है, जब बीजेपी रिकॉर्ड तोड़ गुजरात में चुनाव जीतती है, सारे विपक्ष लग  जाते है अपनी हार का ठीकरा EVM पर फोड़ने| पार्टियों में हिम्मत नहीं रही की अपनी हार का सही आकलन जनता के सामने रख सके| कांग्रेस, समाजवादी, बसपा और कई समय समय पर EVM  को ढाल बना ही लेते है|  अपने वामन मेश्राम जी ने तो इसे राष्ट्रीय मुद्दा बना रखा है| एक तो अपने अपने आपको साइबर एक्सपर्ट कहता नहीं थकता था और सीटों की वोटिगं क्लेम  करता था| लंदन और अमेरिका जाने कहा कहा से वीडियो आते थे उसके और सईद शुजा अपने आपको बोलता था| बीजेपी भी इससे अछूती नहीं रही जब वो विपक्ष में थी और आडवाणी जी ने बैलट पेपर से वोटिंग करने की मांग करी थी| आम आदमी पार्टी ने तो लाइव EVM हैकिंग सेशन करवाया था| २०१७ में जब बीजेपी उत्तर प्रदेश का विधान स२०२२ में जब फिर से बीजेपी जीती तो इस बार समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश जी ने मोर्चा खोल दिया जब की उनके पार्टी को १२५ सीटें मिली थी, लगभग तीन गुना २०१७ के मुकाबले| समय समय पर EVM की छेड़छाड़ की खबरे आती रहती है और हारने वाला EVM के गलत उपयोग को लेकर जीतने वाले को घेरता रहता है| 

EVM एक इलेक्ट्रॉनिक उपक्रम है और इससे छेड़छाड़ भी संभव है. यह वन टाइम प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रॉनिक उपक्रम है| २०१७ में जब बीजेपी फिर चुनाव जीती थी तब बसपा की चीफ बहन मायावती जी ने भी EVM पर सवाल उठाये थे| EVM  की विश्वसनीयता को देखते हुए कई देशों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है। 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी ईवीएम को लेकर फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए थे। प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, मशीन एक अकेली, गैर-नेटवर्क वाली, एक बार प्रोग्राम करने योग्य इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो न तो बाहरी रूप से कंप्यूटर नियंत्रित होती है और न ही आंतरिक रूप से या किसी नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। 2018 में बॉम्बे हाई कोर्ट में एक पीएलआई दायर की गई थी जिसमें ECIL और BEL द्वारा मैनफैक्चर नंबर के बीच अंतर को उजागर किया गया था और इलेक्शन कमीशन द्वारा रेसिव किये EVM के साथ। यह पूरी तरह से आरटीआई पर आधारित है। कोर्ट ने साफ़ किया था इसका EVM छेड़छाड़ से कोई लेना देना है और इसे अगल से देखा जाये| अभी तक कोई भी पक्के साबुत के साथ EVM छेड़छाड़ को साबित नहीं कर पाया है| EVM पर सवाल उठाने वालों पर सवाल उठता है और संदेह होता है जब इलेक्शन कमिशन ने सभी को खुला आमंत्रण दिया था की छेड़छाड़ साबित करे तब एक भी पार्टी नहीं पहुंची थी| संदेह थोड़ा और मजबूत हो जाता है जब पार्टिया जितने के बाद कुछ नहीं बोलती या फिर बोले तो सिर्फ चुनाव हारने के बाद ही बोलती है| 

EVM एक भूत की तरह नज़र आती है जो चुनाव हारने रूपी अंधकार में ही निकलती है| कुछ दिनों में गायब हो जाती है और जहा जहा पार्टिया जीतती है वहा इस भूत को काबू कर लिया जाता है| बहुजनो और वंचितों को जैसे मंदिरों में, भूत प्रेतों में, हिन्दू मुस्लमान में, पाकिस्तान चाइना में और यहाँ तक भगवा और हरे रंग में उलझाए रखते है वैसे ही EVM में उलझाए रखते है जिससे हम लोग अपनी सारी ऊर्जा यहाँ निकल दे, असली जमीनी कामों पर ध्यान न दे| और कई लोग तो इतने हतोत्त्साहित हो गए है की मान बैठे है की अब कुछ नहीं होने वाला| 

मेरा बहुजनो और वंचितों से आग्रह है की EVM रूपी भूत के पीछे न पड़ा जाये और चुनाव कैसे जीते जाए इस पर ध्यान लगाया जाए| लोगों से संपर्क बनाया जाये , लोगों के मुद्दे उढ़ाये जाये, समाज के लिए जमीन पर उतरा जाये| 

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