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बहुजनों का घटता मजबूत राजनैतिक प्रतिनिधित्व

 बाबा साहेब जी खुद एक पूरी पूरी पाठशाला है और कही और जाने की जरुरत नहीं है हम बहुजन लोगों को ये समझने के लिए की आधुनिक भारत को एक सही और मजबूत लोकतांत्रिक देश बनाये रखने के लिए एक विपक्ष का होना और सभी का प्रतिनिधित्व बहुत जरुरी है| बाबा साहेब जी को तो समय नहीं मिला एक सक्षम और मजबूत राजनैतिक विपक्ष देने का आर. पी. आई. के रूप में उन्होंने सोच बनायीं थी पर वे खुद पूरी नहीं कर सके| उनके कदमों पर चल कर अगर सही में राजनैतिक सक्षम और मजबूत बहुजनों का विपक्ष देने की कोशिश की है तो वो है कांशीराम जी| बाबा साहेब जी ने कहा था की राजनीती एक ऐसी सत्ता की चाबी है जिससे आप हर मुश्किल ताला खोल सकते हो, वो हम लोगों को सत्ता पर बैठा देखना चाहते थे| और कांशीराम जी ने काफी हद तक हम बहुजनों को वो ताकत दे दी थी| अगर अब उत्तर भारत और मध्य भारत की बात करू तो कोई भी ऐसा नेता नहीं दीखता जो बाबा साहेब का सपने के आस पास भी हो| बाबा साहेब ने हमें सत्ता की चाबी थामने को कहा और हमारे कई नेता दूसरों को सत्ता हासिल करने में सहयोग देने की होड़ में लगे है| खुद के दम पर एक सांसद और एक विधायक नहीं दे पाते समाज को और बातें बहुत सी करते है जैसे उनसे बड़ा विद्वान कोई है ही नहीं| ऐसे नेताओ की वजह से ही समाज पथभ्रस्ट हो चला है| समाज में निराशा और गिरा मनोबल है| 

फोकस की कमी और सय्यम की कमी साफ दिखती है| हमारी विचार धारा जोकि जाहिर सी बात है की बाबा साहेब जी के विचारों से प्रेरित है| जो समता मूलक समाज की कल्पना करता है| सबका साथ सबका विकास जैसे भ्रमित कर देने वाले वादों से हमारे नेता भी अछूते नहीं है| बाबा साहेब जी के नाम पर कही बिल्डिंग, बड़े बड़े नारों या उनके मूर्तियों के पीछे बाबा साहेब जी के असली सपने कही छुप से गए है| बहुजनों के प्रतिनिधि अगर कांग्रेस, बीजेपी, आप या ऐसे किसी पार्टी से चुन कर जाते है तो निश्चित ही प्रतिनिधि तो पहुंच रहा है और पर प्रतिनिधित्व नहीं| प्रतिनिधि के अकेला होता है पर प्रतिनिधित्व उसे समाज का होता चाहिए| 

जब मैं स्नातक कर रहा था तब मध्य प्रदेश की सरकार में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के लिए ३३% मार्क लिमिट लगा दी थी जो की पहले से नहीं बताई गयी थी, ऐसे विद्दार्थियों से कहा गया की आप को एक साल ११ वी और १२ वी का फाउंडेशन कराया जायेगा| मध्य प्रदेश में १०० से ज्यादा आरक्षित विधायक चुन कर आते है पर सत्ता पक्ष के एक ने भी इसके खिलाफ आवाज नहीं उठायी| क्योकि वो समाज का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा था बस एक प्रतिनिधि बन कर बैठा था| और ये एक नहीं ऐसे कई मौके है जैसे SC/ST एक्ट में बदलाव, रिजर्वेशन पालिसी में बदलाव, एजुकेशन पालिसी में बदलाव, वेललफरे फण्ड में बदलाव जिसका सीधा असल बहुजनों पर पड़ता है| पर सत्ता पक्ष के तरफ से बैठे समाज के प्रतिनिधि कभी भी इनसे खिलाफ नहीं बोलते और नहीं एक जुट आते है| समाज को प्रतिनिधित्व चाहिए पीछ लग्गू या चाटुकार प्रतिनिधि नहीं| 

हमारे पास बाबा साहेब जी द्वारा दिया हुवा सब कुछ है बस चाहिए तो कुछ नेताओ की  जो लगन से, धैर्य से फोकस हो कर उसे अमल में लते रहे| हमें समाज में सजग नेताओ की जरुरत है| 

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