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जाती से जातिनिरपेक्ष कब?

 इन दिनों चर्चा मे आता रहता है जातिवाद। पहले जातिवाद को समझते है| जातिवाद क्या होता है? जाति को महत्व या स्वीकृति देना और उसके आधार पर भेदभाव करना, किसी जाति विशेष को दूसरी जातियों से श्रेष्ठ बताना या मानना| पर क्या जाति को महत्व देना भी जातिवाद है या किसी एक विशिस्ट जाती की उथ्थान की बात करना भी जातिवाद है? मेरी नज़र में नहीं, जातिवाद शब्द को भेदभाव से अलग कर के नहीं देख सकते और देखना भी ठीक नहीं होगा| हम जातिवाद और जातिवादी दोनों शब्दों को एक नकारात्मक रूप से ही देखते आये है| आज कल इतिहास की तरह शब्दों का मतलब भी अपने हिसाब से बदलने का रिवाज़ चल पड़ा है| पर हमे स्पस्ट रहना होगा और ध्यान में भी रखना होगा की कौन जातिवादी है और कौन नहीं| विशिष्ट जाती के उत्थान की बातें करना या कई जातियों की हक़ की बातें करना कतई जातिवाद नहीं है| जो वंचित और मानी हुयी निचली जातियों के हक़ और उत्थान की बात करते है वो कतई जातिवादी नहीं है|  एक और शब्द है धर्मनिरक्ष जिसका अर्थ होता है किसी खास धर्म का समर्थन न करना और सभी धर्मों को बराबर मानना| मेरे हिसाब से इसी तरह जातिनिरपेक्ष शब्द होना चाहिए| हमे सभी...

८ जनवरी अंतरास्ट्रीय बुद्धिस्ट फ्लैग दिन

यह प्रार्थना के स्थान पर झंडे लगाने की बात नहीं है, प्रार्थना के प्रतीक ये झंडे आपको लगभग सभी प्रार्थना स्थलों में प्राणियों और पूरे विश्व के लाभ के लिए मिलते हैं। आपने बौद्ध प्रार्थना स्थलों पर रंगीन कपड़े के सुंदर झंडे देखे होंगे, आध्यात्मिक अर्थ मैं अभी व्यक्त नहीं करूंगा। रंगीन झंडों की परंपरा प्राचीन काल में भी देखी जा सकती है। तिब्बत, चीन, फारस, भारत, श्रीलंका, भूटान और कई अन्य देशों में एक लंबी परंपरा रही है। बौद्ध ध्वज आधुनिक काल की रचना है और शायद ये रंगीन झंडे ही इनकी प्रेरणा होंगे| माना जाता है को इसे १८८० में सीलोन (वर्तमान में श्रीलंका) में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान को चिह्नित करने के लिए श्री जे.आर. डी सिल्वा और कर्नल हेनरी स्टील ओल्कोट (अमेरिकी पत्रकार) द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन किया गया था।  बौद्ध ध्वज पहली बार 1885 में श्रीलंका में फहराया गया था। ध्वज बाद में बौद्धों की एकता का प्रतीक बन गया। तत्पश्चात, इसका उपयोग दुनिया भर में किया गया है और लगभग 60 देशों में सभी बौद्ध उत्सवों के दौरान इसका उपयोग किया गया है। हम लोगों ने बुद्धिस्ट धर्म को बाबा साहेब जी के म...