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बहुजन समाज पार्टी की प्रासंगिकता और जरुरत

भारतीय राजनीती में  बहुजन समाज पार्टी का कैसा भी प्रदर्शन रहा हो पर हर आने वाले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का एक महत्त्व होता ही है और आगे भी रहेगा। २०२४ का चुनाव भी इससे अछूता नहीं है व बहुजन समाज पार्टी की नेता, मायावती जी,  एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती रहती हैं।इसके कई महत्वपूर्ण कारन दिखाई देते है| दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों को चिहिए की बहुजन समाज पार्टी को जितना हो सके मज़बूत बनाये ताकि वो मज़बूत हो सके|  पहला वोट बैंक: उत्तर प्रदेश ही नहीं भारतवर्ष में दलित वोट बैंक पर मायावती का अच्छा खासा प्रभाव है. दलित एक महत्वपूर्ण मतदान समूह हैं, और उनका समर्थन चुनावी नतीजों को आकार देने में महत्वपूर्ण हो सकता है|  सामाजिक गठबंधन: मायावती जी, कांशीराम जी के प्रायाशो की उत्तराधिकारी है जो की दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों को एक साथ लाकर एक सामाजिक गठबंधन बनाने के प्रयासों के लिए जाने जाते है। और अगर लीडिंग पार्टीज इसका धयान न रखे तो यह चुनाव को कही भी मोड़ दे सकती है और एक निर्णायक कारक हो सकती है। क्षेत्रीय प्रभाव: उत्तर प्रदेश, मध्य ...

I.N.D.I.A गठबंधन और मायावती

 फिछले कुछ महीनों से बड़े जोरो शोरो से मीडिया में खबर आयी थी की मायावती जी या कहे BSP I.N.D.I.A गठबंधन में आणि वाली है, कई लोगों से बातें चल रही है और मीडिया के लोगों ने तो इसे मायावती जी का BJ party को मात देने की तुरुप की चाल बताई। फिर एक खबर आती है की मायावती जी के किसी नजदीकी पर ED की नज़र है| जिससे चित भी मेरी और पट भी मेरी वाली बात लगती है, कांग्रेस को कहने में आएगा की देखिये BJ party को हारने के लिए हमने तो शुरुआत की और I.N.D.I.A   गठबंधन को फायदा भी मिलता और अगर BSP आती नहीं तो कहते की ED से डर कर BSP नहीं आयी|  सिर्फ तीन पार्टियों की बातें करें BJP, कांग्रेस और BSP, सब का अपना अपना वोट बैंक है और कांग्रेस जो की बीजेपी को सीधे हारते हुए नहीं दिखती, BSP के वोट बैंक पर नज़र है| मेरी नज़र में कांग्रेस अपनी लाचारी और नाकामी छिपाने के लिए सब कर रही है| कांग्रेस BJP की तोड़ नहीं ला पा रही है, देश की जनता को अपने विचारधारा और अपने पार्टी से जोड़ने में नाकाम है| मैंने अभी कुछ दिनों में ही पांच छ: मैसेज देखे जहा चिंता जताई गयी की अब BJP को कैसे हराया जाये या भी BSP तो ख़तम य...

आज बहुजनों के एक मात्रा पार्टी बहुजन समाज पार्टी

 बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ही एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है जो आज भी कांग्रेस और भाजपा के सामने अपने दम पर खड़ी है। बहुजनों को एक मजबूत पार्टी के महत्व को समझना होगा और बहुजन समाज पार्टी के पीछे खड़ा होना होगा। यही एक पार्टी है जो की बहुजनो को सही प्रतिनिधित्व दे सकती है|  पिछले कुछ दिनों से कहा जा रहा है की बसपा और उसकी नेता मायावती जी हाल के कुछ वर्षों में राजनीतिक प्रदर्शन में चुनौतियों का सामना कर रही हैं।एक कारण ये बताया जा रहा है की बहुजन और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मतदाताओं के अपने मूल आधार के बाहर नए समर्थन को आकर्षित करने में पार्टी की असमर्थ रही है| दूसरा कारण ये बताते है की बसपा ने अपने मूल समर्थकों का समर्थन भी खो दिया है। इसके अलावा, मायावती जी का 2019 में समाजवादी पार्टी से नाता टूट जाना, जिसे उनकी एक "बड़ी गलती" के रूप में प्रचारित किया गया और कहा गया की बसपा उत्तर प्रदेश में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं और अब पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं रहा। मेरे हिसाब से राजनीती में उतार और चढाव आते रहते है उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी आज भी एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती रह...