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बहुजन समाज पार्टी की प्रासंगिकता और जरुरत



भारतीय राजनीती में  बहुजन समाज पार्टी का कैसा भी प्रदर्शन रहा हो पर हर आने वाले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का एक महत्त्व होता ही है और आगे भी रहेगा। २०२४ का चुनाव भी इससे अछूता नहीं है व बहुजन समाज पार्टी की नेता, मायावती जी,  एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती रहती हैं।इसके कई महत्वपूर्ण कारन दिखाई देते है| दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों को चिहिए की बहुजन समाज पार्टी को जितना हो सके मज़बूत बनाये ताकि वो मज़बूत हो सके| 


पहला वोट बैंक: उत्तर प्रदेश ही नहीं भारतवर्ष में दलित वोट बैंक पर मायावती का अच्छा खासा प्रभाव है. दलित एक महत्वपूर्ण मतदान समूह हैं, और उनका समर्थन चुनावी नतीजों को आकार देने में महत्वपूर्ण हो सकता है| 


सामाजिक गठबंधन: मायावती जी, कांशीराम जी के प्रायाशो की उत्तराधिकारी है जो की दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों को एक साथ लाकर एक सामाजिक गठबंधन बनाने के प्रयासों के लिए जाने जाते है। और अगर लीडिंग पार्टीज इसका धयान न रखे तो यह चुनाव को कही भी मोड़ दे सकती है और एक निर्णायक कारक हो सकती है।


क्षेत्रीय प्रभाव: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना भारत में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से है। हमारा मत अलग हो सकता है पर इसमें दो राय नहीं की दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी बहुजन समाज पार्टी ही है| इन जैसे कई राज्यो में पार्टी का प्रभाव चुनाव के समग्र परिणाम को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


मुद्दे और एजेंडा: मायावती जी की पार्टी उन विशिष्ट मुद्दों और एजेंडों पर ध्यान केंद्रित करती है जो आबादी के एक महत्वपूर्ण वर्ग से संबंधित हैं। अगर ये मुद्दे चुनावी चर्चा में तूल पकड़ते हैं या गंभीर हो जाते हैं, तो इससे मायावती जी का महत्व बढ़ सकता है।


तीसरा मोर्चा या गठबंधन की गतिशीलता: भारतीय राजनीति में गठबंधन बनना या तीसरे मोर्चे का उभरना कोई असामान्य बात नहीं है। बाबा साहेब जी को भारत रत्न जैसे निर्णय व मंडल आयोग जैसे निर्णय भी तभी लिए गए थे, ऐसे परिदृश्य में मायावती जी की भूमिका और निर्णायक व राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक परिदृश्य गतिशील हैं, और समय के साथ ऐसे विकास हो सकते हैं जो मायावती जी की पार्टी की प्रासंगिकता और महत्व को प्रभावित कर सकते हैं।

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